Sunday, 24 January 2021

अफ़सोस... افسوس


मंदिर के सामने एक पेड़ खड़ा हैं
वो गणपती की मूरत की तरफ
देखता रेहता हैं
उस पेड़ की किस्मत मैं
ताउम्र खुदा की नज़र के सामने रहना 
लिखा था
वो इबादत करता होगा ?
शायद,
उसका खड़ा रहना ही 
उसकी इबादत होगी
ये मंदिर पेहेले बना या ये पेड़
ये मैं नही जानता
लेकिन मैंने खुदा को कई बार
मंदिर से निकल कर
पेड़ पर चढ़ते देखा हैं
खुदा पेड़ पर चढ़ कर 
पंछियों के साथ खेलता है
और कई बार
पेड़ का एक बेजान पत्ता
हवा पर नाचते हुए
खुदा के पैरों पर आकर गिर जाता है
उस मंदिर मैं कई लोग आते है
खुदा की तरफ देखते है तो
पेड़ की तरफ पीठ कर देते है
और जाते समय खुदा को पीठ दिखा कर
पेड़ को देखते है
उस मंदिर और पेड़ के बीच का फासला समझने मे
एक उम्र निकल जाती है
कई बार ऐसा भी लगता है
की शायद
खुदा ही उस पेड़ की इबादत करता होगा
मुझे ऐसा लगता है 
की मेरा वजूद
उस मंदिर और पेड़ के बीच
कही खोया हुआ है

खुदा को अपने पेड़ ना होने पर
और 
पेड़ को अपने खुदा ना होने पर
बोहोत अफसोस था
और
उस पेड़ और मंदिर के बीच 
अपना वजूद ढूंढता मैं
शायद
उस अफसोस कि इबादत करता हूं
जो पेड़ को खुदा से
और खुदा को पेड़ से था




مندر کے سامنے ایک پیڑ کھڑا ہے
وہ گنپتی کی مورت کی طرف 
دیکھتا رہتا ہے
اُس پیڑ کی قسمت میں 
تاءمر خرا کی نزر کے سامنے رہنا 
لیکھا تھا
وہ ءبادت کرتا ہوگا ؟
شاید,
اس کا کھڑا رھنا ہی
اُسکی عبادت ہوگی
یہ مندر پہلے بنا، یا یہ پیڑ
یہ میں نہیں جانتا
لیکن میں نے خدا کو کئی بار
مندر سے نکل کر
پیڑ پر چڑھتے دیکھا ہے
خدا پیڑ پر چڑھکر 
پنچھیوں کے ساتھ کھیلتا ہے
اور کئی بار
پیڑ کا ایک بےجان پتہ
ہوا پر ناچتے ہوئے
خدا کے پیروں پر آکر گر جاتا ہے
اُس مندر میں کئی لوگ آتے ہیں
خدا کی طرف دیکھتے ہیں تو
پیڑ کی طرف پیٹھ کر دیتے ہے
اور جاتے سمے خدا کو پیٹھ دیکھا کر 
پیڑ کو دیکھتے ہے
اُس مندر اور پیڑ کے بیچ کا فاصلا سمجھنے میں
ایک عمر نکل جاتی ہے
کئی بار ایسا بھی لگتا ہے
کی شاید
خدا ہی اُس پیڑ کی عبادت کرتا ہوگا
مجهے ایسا لگتا ہے
کی میرا وجود
اُس مندر اور پیڑ کے بیچ
کہیں کھویا ہوا ہے

خدا کو اپنے پیڑ نہ ہونے پر 
اور
پیڑ کو اپنے خدا نہ ہونے پر
بہت افسوس تھا 
اور
اُس پیڑ اور مندر کے بیچ
اپنا وجود ڈھونڈتا میں
شاید
اُس افسوس کی عبادت کرتا ہوں
جو پیڑ کو خدا سے
اور خدا کو پیڑ سے تھا۔۔۔